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Sunday, 12 June 2016

जब बीजेपी की महिला मंत्री ने शूट करवाया हज़ारों सुअरों को

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नीलगायों की मौत पर ख़ूब हायतौबा मच रही है। केंद्र में सत्तारूढ़ दल के दो केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी और प्रकाश जावड़ेकर आमने-सामने हैं। मगर इससे पहले भी बीजेपी की सरकार ऐसे कारनामे कर चुकी है। 
बता दें कि मध्य प्रदेश की बीजेपी सरकार में कैबिनेट मंत्री और शिवपुरी विधानसभा से विधायक यशोधरा राजे सिंधिया के निर्देश पर नगर पालिका ने सुअरों को मारने के लिए बाक़ायदा निविदाएं (टेंडर) निकाले थे। जब कोई भी इन्हें मारने तैयार नहीं हुआ, तो मंत्री साहिब ने हैदराबाद के नवाब परिवार से ताल्लुक रखने वाले शफ़ाक़त अली को विशेष आग्रह पर बुलाया। 
सुअर मारने का नवाबी शौक़ रखने वाले शफ़ाक़त ने सैकड़ों सुअरों को पुराने राजा-महाराजाओं के शिकार की तर्ज़ पर मार डाला। बन्दूक से दनादन फ़ायर ठोके। निशाने पर थे केवल सुअर। लेकिन उस समय मेनका गांधी कुछ न बोलीं। मानो मुँह में दही जम गया हो। 
महिला एवं बाल विकास मंत्री मेनका गांधी और पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर
अब बेचारे पर्यावरण मंत्री जावड़ेकर के पीछे पड़ीं हैं जिन्होंने पर्यावरण मंत्री होने के नाते बिहार को नीलगायों को मारने की अनुमति दी है। ख़ैर, शिवराज कबीना के मंत्रियों की अपनी अलग ठसक है। वे किसी की दखलंदाज़ी बर्दास्त नहीं करते। प्रदेश में पिछली बार वन मंत्री रहे सरताज सिंह से भी प्राणी प्रेमी मेनका गांधी की ठन चुकी थी।
बहरहाल, बताते हैं कि एक समय शिवपुरी में सुअरों का दुस्साहस इतना बढ़ गया था कि गली-कूचों से गुजरने पर बच्चों पर आक्रमण करने लगे थे। वहां के ताक़तवर राजा सिंधिया भी इन सुअरों के आगे बेबस नज़र हो गए।
ख़ास बात यह है कि अभी तो केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय ने बिहार में फसलों को नष्ट कर रहीं नीलगायों को मारने की केवल अनुमति दी है। लेकिन शिवपुरी नगरीय प्रशासन ने तो नवाब को 375 रुपए प्रति सूअर शूट आउट करने पर भुगतान किया। 
मध्यप्रदेश की उद्योग और खेल मंत्री यशोधरा राजे सिंधिया
मारे गए सुअरों की संख्या का अनुमान इस बात से लगाया जा सकता है कि, नगर पालिका ने नवाब को वर्ष 2015 में 18 लाख रुपए का भुगतान किया। इसके अलावा नवाब और उनकी टीम इस साल भी को क़रीब-क़रीब 1000 से ज़्यादा सुअरों को निपटा चुकी है। इसके लिए नवाब को अब तक तक़रीबन 3-4 लाख का भुगतान किया जा चुका है. 
शिवपुरी में सुअरों को शूट करते हैदराबाद के नबाव 
यही नहीं, नगरपालिका और नवाब के बीच मरे हुए सूअरों की गिनती में गलतफहमी के चलते इंजीनियरों से सुअरों की गिनती कराई गई। इसके अलावा सुअर पालने वालों पर नगरीय प्रशासन धारा 188 के तहत मामले भी दर्ज़ करने लगा। इसके बाद पालक अपने सुअरों को रिश्तेदारों के यहां छोड़कर आने लगे। 

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