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Tuesday, 7 October 2014

पटना में भगदड़



पटना में भगदड़...चित्रकूट में भगदड़....इलाहाबाद में भगदड़...यहां भगदड़..वहां भगदड़। कौन कराता है ये भगदड़ ? कैसे होती है ये भगदड़ ? भगदड़ से हमारी सल्तनतें क्या सबक लेतीं हैं ? आज तक कितने भगदड़ कराने वालों..अफवाह फैलाने वालों काे हिरासत में लिया गया ? ..न जाने कितने ही सवाल इन ख़बरों को सुनने वाली आवाम के जेहन में उठते होंगे..लेकिन सियासतदां अपनी चतुर चालें चलकर मामले का ठंडा करने में माहिर जो है। पटना में घटी घटना के बाद चहुं ओर रुदन, क्रंदन, हाहाकार..सुनाई दे रहा है......।


बुरा करने के लिए लिए जगत में कुख्यात वो मनहूस रावण, आज अपने साथ न जाने कितनों को ले जा रहा है। अब रावण को ही दोष देना सही होगा, क्योंकि पटना में सरकार तो ठेके पर चल रही है। प्रशासन धोके पर चल रहा है। इस समय तो लग रहा है..वहां किसी का किसी पर कंट्रोल ही नहीं बचा। अब सुनिए न इन तमाम रविशंकर प्रसादों..पासवानों...समेत दिग्गज कहलाने वालों की। इसमें में भी ये माननीय थोड़ा-बहुत सियासत का तड़का लगाने से नहीं चूके।

प्रसाद कह रहे हैं-'' यह न केवल एक दुर्भाग्यपूर्ण और अफसोसजनक घटना है बल्कि शर्मनाक भी है. हर साल गांधी मैदान में दशहरा समारोह का आयोजन किया जाता है. इसके बावजूद कोई उचित प्रबंध नहीं किए गए...हाल ही में वहां छठ पूजा के दौरान हादसा हुआ था. पिछले वर्ष अक्तूबर में नरेन्द्र मोदी की रैली के दौरान घटना हुई थी.’’ वहीं, केन्द्रीय मंत्री पासवान भी यही राग अलाप रहे हैं। ख़ैर ये तो इतना भी बोल रहे हैं लेकिन बिहार सरकार तो लगता है जु़र्म करके फरारी काटने चली गई है। वहां तो कोई कुछ बोल ही नहीं रहा। मंत्रियों के फोन बंद...कान बंद..। अब भला रात में भी क्या करेंगे वो आकर। जिन्हें जाना था.. वो चले गए..। जिन्हें मरने वालों की बिछड़न में रोना हैं..वे रो रहे हैं..। अब सब मामला सुबह ही देखा जाएगा..।
वो तो भला हो इस मुल्क़ के निज़ाम का, जिसने आधी रात को ही सूबे की सरकार से पहले काल के गाल में समा गए लोगो के परिवारों को मुआवज़ा रूपी मरहम लगा दी.. और करते भी तो क्या...उनका तो यही फर्ज़ बनता है।
अब फिर वहीं पुराना राग शुरू होगा..जो हर बार होता है..। सूबे से घटना की रिपोर्ट मांगी जाएगी...फिर किसी को बलि का बकरा बनाया जाएगा...फिर वोटों की गाेटियां बिठाई जाएंगी। सत्ता के साधकों के द्वारा इस मामले को फिर ''चर्चा करके, चिंता करके..चलता'' करने में देर नहीं की जाएगी। करें भी तो क्या ?? पुरानी आदत जो पड़ गई है।
आगे की कार्रवाही भी जान लीजिए..। जहां घटना हुई वहां का करोडा़ें का दौरा होगा..उड़नखटोले उतरेंगे..हैलीपैड बनेंगे...फोटोग्राफी होगी...ज़रा सी सियासत भी होगी। फिर आगे की सुनिए ...। एंबेसडर गाडि़यों के आगे-पीछे हमारे अफसरान दौड़ेंगे...गुफ्तगू होगी..एक-दूसरे निज़ामों को दोषी ठहराने की फाइलें तैयार होंगी.. और फिर तैयार हाेगा दुर्घटनास्थल की दुरूस्त व्यवस्था के लिए भारी -भरकम पैकेज...जिससे कभी उस जगह ऐसी घटना न घट सके। ..जिसमें सबका सार निहित है।.. फिर जैसा कि आप सब को पता है....

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