अब न रहे वो नारे, जिनको लगाते थे दल सारे :-
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- -इस दीपक में तेल नहीं, सरकार बनाना खेल नहीं।
- -जली झोपड़ी भागे बैल, यह देखो दीपक का खेल।
- -बेटा कार बनाता है, मां बेकार बनाती है।
- -एक शेरनी सौ लंगूर, चिकमंगलूर चिकमंगलूर।
- -स्वर्ग से नेहरू रहे पुकार, अबकी बिटिया जहियो हार।
- -आधी रोटी खाएंगे, इंदिरा को लाएंगे।
- -इंदिरा जी की बात पर मुहर लगेगी हाथ पर।
- -सौगंध राम की खाते हैं, मंदिर वहीं बनाएंगे।
- -जिसने कभी न झुकना सीखा, उसका नाम मुलायम है।
- -अबकी बारी अटल बिहारी।
- -जब तक सूरज चांद रहेगा, इंदिरा तेरा नाम रहेगा।
- -सोशलिस्टों ने बांधी गांठ पिछड़े पावैं सौ में साठ।
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