न कुछ करेंगे आैर न सुधरेंगे
नीरज
*पेट्रोल-डीज़ल मंहगा*
घर के पास की चक्की पर जाएंगे तो बाइक से, बच्चों को घुम्मी कराएंगे तो बाइक से, हज़ामत बनवाने जाएंगे तो बाइक से, फर्राटे भरेंगे तो बाइक से, लांग ड्राइव जाएंगे तो कार से......।। न जाने कितने ग़ैरवाजि़ब काम करेंगे वो भी बाइक-कार से, जो पेट्रोल-डीज़ल से चलते हैं फिर कोसेंगे सरकारों को यूपीए ने सही शासन नहीं चलाया, भाजपा वाले अच्छे दिन नहीं ला रहे...।। अरे !! महानुभावों जो जिस साधन जिस काम के लिए बनाया गया है, उसका उसी हिसाब से इस्तेमाल करो फिर देखना चमत्कार।।
*खान-पान में मंहगाई*
जनसंख्या का विस्फोट बदस्तूर जारी है, अस्पतालों में दिन-प्रतिदिन लाखों की संख्या में मनुष्य उत्पादन जोराें पर है, देशभर की उपजाऊ ज़मीनों पर विदेशी पैसों से रियल स्टेट जैसे विशालकाय दैत्य ने पैर पसार लिए हैं, ग्लोबल बार्मिंग के चलते ज़मीनों की उर्वरकता क्षमता कम हो रही है, रसायनिक बीजों ने पैदावार ज्यादा के चक्कर मिट्टी को कहीं का नहीं छोड़ा, छोटी-छोटी नदियां दम तोड़ती जा रही हैं, सालों से देश में बड़े बांध बन नहीं पा रहे हैं, मनरेगा की पैसे से बनने वाले स्टॉप डैम चंद दिनों बाद ढह जाते हैं......आदि आदि। अब कहते हैं कि मंहगाई सुरसा के मुंह की तरह बढ़ती जा रही है। अरे, विचारवानों जब सब कारण जानते हो, फिर भी ऐसी हरकतों से जो प्रक्ति को नुकसान पहुंचाए, बाज नहीं आओगे तो कोई अर्थशास्त्री तो क्या स्वयं कौटिल्य या भगवान अवतार ले लें तो शायद ही कुछ कर पाएं।।
*अपराध की तो पूछो ही मत*
आजकल दिन-ब-दिन क्राइम तो बढ़ता ही जा रहा है, आज पतली गली में करोड़ों की लूट हुई...., कल हैरान मोहल्ले में हाईटेक तस्कर -डकैतों ने लाखों उड़ाए...., परसों परेशान चौक पर दबंगों ने एक व्यापारी को घसीटकर मारा, जिससे दंगे भड़के........ आतंकवादी कम डकैत ज्यादा हाईटेक बंग्लादेशी गिरोह को दुखीगंज से गिरफ्त मे लिया.... ।। ने जाने कितनी क्राइम कांड देखने व सुनने को मिल रहे हैं, सरकार है कि कुछ करती नहीं।। हम नेता चुनते समय जातिवाद का पूरा ध्यान रखेेंगे, उसके चरित्र को यह कहकर साफ कर देंगे कि आजकल दूध का धुला कौन है, क्रिकेट की छोटी-सी बहस में भी खेल भावना का ध्यान न रखते हुए सांप्रदायिकता का पूरा ध्यान रखेंगे.....। अब ऐसी करामातों से अपराध का बोलबाला नहीं होगा तो क्या शांति का वातावरण बनेगा..।।
पान की दुकान पर खड़े होकर पान की पीक थूकते हुए सचिन तेंदुलकर के एक फैल्युअर पर उसे गाली देने वाले, बड़े-बड़े पढ़े-लिखे महानुभाव जो नेताओं के पूर्व में किए गए नकारात्क-बुरे कृत्येां को नज़रंदाज़ कर जातिवाद के हिसाब से उसे चुनने वाले, गली-नुक्कड़ पर खड़े होकर सरकार व अफसरशाही के रवैए को गालियां देकर माफ करने वाले जमूरे जब तक ख़द नहीं सुधरेंगे तब तक अगर देश तो मोहल्ला भी नहीं सुधर सकता..।।
अंत में, अगर सब कुछ अच्छा होने लगा तो वेद-पुराणों के मुताबिक वो बुरा समय कब आएगा जब भगवान कल्कि कब अवतार लेंगे।। आख़िर, मुसलसल उक्त परेशानियों के बढ़ने से ही बुरे दिन दिनों की शुरूआत होगी.।।
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