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Monday, 16 June 2014



क्योंकि नीरज 'उदास' हूं मैं





पनों के, ग़ैरों के क़र्ज़ तले दबा उदास हूँ मैं

कोई न पहने वह लिबास हूँ मैं
ज़िन्दगी की तमाम इम्तेहानों में न पास हूँ मैं
कुछ दर्द है, कुछ चुभन है , इसलिए हताश हूँ मैं
कोई मुझसे पूछे कैसे हो ?, बोलूं फर्स्ट क्लास हूँ मैं
पर सब जानते नीरज 'उदास' हूँ मैं।।।





ता-अबद ताबानियाँ देने वाला चाँद हो या ख़ुर्शीद,

ताख़िर-औ-शाम से निकले वो तलाश हूँ मैं 
इस तरह गौर से न देखो, खाली गिलास हूँ मैं
न जाने कितने काइद आये और गए ग़ली-ए-मुल्क़ में
अपने अपनों के लिए मुहब्बत-ए-ख़ास हूँ मैं
पर सब जानते ही हैं नीरज 'उदास' हूँ मैं।।।




शिक्षक की क्लास, हंसोड़ो के लिए अट्टाहास हूँ मैं

जिसको खाते नहीं चौपाये, वह घास हूँ मैं
वैसे कोई मुझसे पूछे कि, कैसे हो ?
तो मैं बोलूं कि फर्स्ट क्लास हूँ मैं
पर सभी जानते नीरज 'उदास' हूँ मैं।।




पनों के, ग़ैरों के क़र्ज़ तले दबा 'बकवास' हूँ मैं

फिर भी फ़र्ज़ाने कहते चुप न होने वाला अल्फ़ाज़ हूँ मैं
कितनी भी वस्फ़ करो यारों, मानूंगा नहीं,
क्योंकि ता-अबद नाख़ुश रहने वाला नीरज 'उदास' हूँ मैं।।

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