''कहावत है कि एक बार ‛बनारस' में हास्य प्रेमी भारतेंदु हरिश्चन्द्र ने ढिढोरा पिटवा दिया कि अमुक वैज्ञानिक अमुक समय पर चंद्रमा और सूरज को धरती पर उतार कर दिखयेंगे। नियत समय पर लोगों की भीड़ इस अद्भुत करिश्मे को देखने जमा हो गई। घंटों लोग इंतज़ार में बैठे रहे परन्तु वहां कोई वैज्ञानिक नहीं दिखाई दिया उस दिन 1 अप्रैल था, लोग मूर्ख बन कर वापस आ गए।
अब बनारस वाले भी समझ चुके हैं कि जैसे अप्रैल का महीना शुरू होगा, वैसे ही मूर्ख बनाने का सिलसिला भी बदस्तूर सियासतदाओं द्वारा चलाया जायेगा। देश के एक अद्भुत,विचित्र और धार्मिक राजधानी में चहुँ ओर गन्दगी का साम्राज्य और उससे पटी तंग गलियाँ जब इतने सालों बाद भी चमक नहीं पाई तो अब उम्मीद मूर्ख बनने की उम्मीद ही की जा सकती है।।''
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