Pages

Thursday, 5 June 2014


एक सामाजिक कार्यकर्ता ने एक विस्थापित व्यक्ति से पूछा :- तुम ज़रूरत पड़ने पर हमसे मदद मांगने आते हो, लेकिन चुनावों में उन्हीं राजनेताओं को वोट क्यों देते हो ?
उसने जो जवाब दिया, वह दिलचस्प है। उसने कहा :- ‛जब मामला ज़िन्दगी और मौत का हो जाता है, तभी हम तुम्हारे पास आते हैं। यह वोट देने से अलग मामला है। वोट देने का मतलब है, अपने लिए रोजगार, राशन, बुनियादी सुविधाएं सुनिश्चित करने के लिए किसी प्रतिनिधि को चुनना और यह काम राजनेता सही ढंग से कर सकते हैं। 
उसने कहा :-एक सामाजिक कार्यकता का आदर्शवाद केवल रोजमर्रा की समस्याएं सुलझाने में बाधक साबित होता है। इसके लिए हमें आदर्शवादियों की ज़रूरत नहीं, व्यावहारिक लोगों की ज़रूरत होती है। सामाजिक सुधारों में काम लगता है, जबकि राजनय तुरत-फुरत में काम करना जानते हैं।
–----------------------------
अंत में, अब सामाजिक कार्यकर्ताओं से सत्ता सँभालने की उम्मीद कैसे करें ? वे बहुत ही आदर्शवादी,न्यायवादी और ईमानदार होते हैं, जो सत्ता के लिए सही नहीं।

No comments:

Post a Comment