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Thursday, 5 June 2014


सरकार गेंदा फूल

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जब तपती दोपहर में जब लालू प्रसाद यादव की चुनावी सभा में छुटभैए नेता दूसरों को कोसने में व गरीबों को सब्जबाद दिखा रहे थे, तब वहां देश के ख्यातिलब्ध पत्रकार रवीश कुमार दूर खड़ी महिलाओं से समस्याएं जान रहे थे। ‘इ का गोबर लगाया है, एक महिला का हाथ देखकर रवीश कुमार ने पूछा।’ महिला का कहना था, ‘नाही गेंदा है..गेंदा फूल का लेप है।’ काहे..क्या हुआ ?, रवीश ने पूछा।’ महिला -‘घाव हुआ है।’


आजादी के कई दशकों के बाद भी देश के कई हस्सों की ऐसी ही हालत है। ये तो बस एक उदाहरण है.. मजमून है..उस तंग, भ्रष्ट व्यव्स्था का। अरबों -खरबों रुपए चुनावी रैलियों में फूंकने वाले..सरकार बनाने के बाद खबरों रुपए का स्वास्थ्य बजट बनाने वाले...सियासतदांओं को जब छींक भी आत है तो वे विदेश चले जाते हैं लेकिन उस तंगहाल गरीब के हाथ में क्या ..।

आखिर वोट ही देता है... और देता क्या है..। प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र हो जिला अस्पताल ..सबके मुखिया ऊपर तक कमाई करके देते हैं दवाईयों से...तो बस, अब चुनाव आएंगे तो उसी कमाई से एक झटके में मुर्गा-दारू से वोट कबाड़ लिए जाएंगे..आखिरकार मीडिया तो है अच्छी-बुरी छवि बनाने के लिए..।..रही बात आवाम के स्वास्थ्य की.. अगर वो ही मजे में रहेंगी तो सियासतदाओं और गरीब में क्या फर्क रहेगा..। निकम्मे, निठल्ले तथाकथित ऐसे सत्ता प्रमियों व उनकी सत्ता पर फिल्म ‘दिल्ली-6’ का गाना ससुराल गेंदा फूल की जगह ‘आवाम गाली देवे , मीडिया वाले समझा लेवें, सरकार गेंदा फूल’ सटीक बैठता है।

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