आशिक़ का जनाज़ा है, ज़रा धूम से निकले
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वरिष्ठ पत्रकार वेदप्रताप वैदिक ने अपने एक लेख में लिखा है कि मोदी ने 282 सीटें दिलाकर भाजपा की एेतिहासिक विजय का तो इतिहास रचा ही है, साथ में कांग्रेस को 44 के अंक पर पहुंचाकर हार को भी ऐतिहासिक बना दिया है. कहा भी गया है कि 'आशिक़ का जनाज़ा है, ज़रा धूम से निकले'
यह मत्ला आख़री मुगल बादशाह बहादुर शाह’ज़फ़र’ के ज़माने के शायर मिर्ज़ा मुहम्मद अली "फ़िदवी’ का है जो मिर्ज़ा "हज्व’ के नाम से भी मशहूर थे .पूरा शेर यूँ है
''चल साथ कि हसरत दिल-ए-महरूम से निकले
आशिक़ का जनाज़ा है ज़रा धूम से निकले''
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वरिष्ठ पत्रकार वेदप्रताप वैदिक ने अपने एक लेख में लिखा है कि मोदी ने 282 सीटें दिलाकर भाजपा की एेतिहासिक विजय का तो इतिहास रचा ही है, साथ में कांग्रेस को 44 के अंक पर पहुंचाकर हार को भी ऐतिहासिक बना दिया है. कहा भी गया है कि 'आशिक़ का जनाज़ा है, ज़रा धूम से निकले'
यह मत्ला आख़री मुगल बादशाह बहादुर शाह’ज़फ़र’ के ज़माने के शायर मिर्ज़ा मुहम्मद अली "फ़िदवी’ का है जो मिर्ज़ा "हज्व’ के नाम से भी मशहूर थे .पूरा शेर यूँ है
''चल साथ कि हसरत दिल-ए-महरूम से निकले
आशिक़ का जनाज़ा है ज़रा धूम से निकले''
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