आज की राजनीतिज्ञों को लेकर घर-घर में परिजनों ने ताना मारना शुरू कर दिए हैं। मैं जिस बस में यात्रा कर रहा था उसमें एक सास अपनी बहू के साथ मेरी पास वाली सीट पर बैठी थी। मुझे तब हंसी आई जब सास ने बहू से डपटते हुए कहा कि, '' केजरीवाल से कुछ तो सीखो, कैसा भी हो, पर बगैर पल्लू लिए घर से नहीं निकलता, तुम हो कि लाज पर्दा नहीं कर पातीं।''
बस से उतरा ही था कि मंज़िल तक जाने के लिए पहले से बुक एक ऑटो का सहारा लेना पड़ा। ऑटो में पहले से मां-बेटी बैठीं थीं, शायद उन्हें भी मेरी मंज़िल तक ही जाना था....। ऑटो वाले ने डबल फायदा कमाने के उद्देश्य से मुझे भी बिठा लिया। अब सवारी हुईं तीन। चलती ऑटो में मां बेटी की बातचीत बदस्तूर ऑटो की स्पीड से तेज थी, फिर भी शोर तो ऑटो का ही ज्यादा था। एक बार फिर हंसे बिना नहीं रह सका क्योंकि मां ने बेटी से कहा ही कुछ ऐसा।
बेटी ने जब किसी बात को लेकर मुंह फुला लिया तो मां ने कहा,-''बात-बात पर आडवानी की तरह गुस्सा हो जाती हो। हम मोदी, गडकरी और सुषमा की तरह नहीं हैं जो तुम्हें बार-बार मनाएंगे।''
फिर भी लोग कहते हैं कि महिलाओं को राजनीति में कम रुचि होती है।
-नीरज(स्वतंत्र अभिव्यक्ति)
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