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Saturday, 6 September 2014

मेक्को न तेरी बातें भाषण लगतीं हैं


नीरज


नाेयडा के एक ख्यात मीडिया संस्थान ने इंटर्न करके लौटी सहपाठी मोहतरमा से यूं ही अनौपचारिक मुलाक़ात हुई। पहले से ही उसकी ख़ैर-मक़दम में लगे दो और शुभचिंतकों के बीच में भी पहुंच गया। तमाम हाय-हैलो के बाद उसने अपने अनुभव सुनाए। इस सब के बीच अचानक मैंने अपने जिज्ञासू और ज्ञान पिपासू स्वभाव के चलते उससे पूछ दिया कि, यार, NOIDA की फुल फार्म क्या है ? बस, फिर क्या..ऐसा लगा कि जैसे शहद की तलाश में गए शख़्स ने ग़लती से छत्ते में हाथ मार दिया हो। एकदम उखड़कर डंकशब्दों से प्रहार करते हुए बोली,-''मेक्को न तेरी बातें भाषण लगतीं हैं, तू ध्यान रखा कर इन फालतू बातों का। चल तू बता दे BHOPAL की फुल फोर्म...बात करता है । तू उन लोगों में से है जो बीए पास व हेट स्टोरी जैसी फिल्मों में मैसेज ढ़ूंढ़ते हैं।'' गर्दन समेत समस्त मुखमंडल को आगे कर और दोनों हाथों को पीछे की ओर खी़चते हुए धाराप्रवाह बोली ही जा रही थी एवं पास खड़े दोनों प्राणी हैरान थे। माेहतरमा तेज़ गति से आगे बढ़ गई और कुछ दूर से मुड़कर बोलतीं हैं,-'तुम फुल फोर्म याद करते रहना आेके, बट आई बिकेम बी ए गुड एण्ड बिग एंकर। और हां मुझे भोपाल का पूरा नाम भी बताना।'

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